बैतूल का बांचा और उमरिया का रंछा अब मध्यप्रदेश के खगोलीय पर्यटन के नक्शे पर आने की तैयारी में हैं। पर्यटन बोर्ड ने छह गांवों में एस्ट्रो-विलेज विकसित करने का काम शुरू किया है। 10 सितंबर की सरकारी सूचना के अनुसार, जनजातीय पर्यटन परियोजना के तहत इसका क्रियान्वयन मई 2026 से चल रहा है।
पहले चरण में धार का ज्ञानपुरा, छिंदवाड़ा का धुसावानी, बैतूल का बांचा, नर्मदापुरम का ढ़ाबा, दमोह का रिछकुड़ी और उमरिया का रंछा चुने गए हैं। इन जगहों को कृत्रिम रोशनी से दूर रात के आकाश के अवलोकन के लिए विकसित किया जा रहा है।
दूरबीन के साथ आकाश समझने की जगह
योजना में टेलिस्कोप, दूरबीन और एस्ट्रो-फोटोग्राफी कैमरे उपलब्ध कराए जाने हैं। तारे देखने के लिए प्लेटफॉर्म और अवलोकन क्षेत्र बनेंगे। ग्रहों, तारामंडलों और खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर भी प्रस्तावित हैं।
गांव के युवा करेंगे मार्गदर्शन
स्थानीय युवाओं को 90 दिन का सघन प्रशिक्षण देकर एस्ट्रो गाइड बनाने की योजना है। वे पर्यटकों को रात का आकाश समझने और उपकरणों से देखने में मदद करेंगे। प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं की संख्या और चयन प्रक्रिया इस सूचना में नहीं बताई गई है।
परियोजना फिलहाल विकास के चरण में है। सरकारी सूचना में पर्यटकों के लिए खुलने की तारीख, बुकिंग या गांववार सुविधाएँ पूरी होने का समय नहीं दिया गया। इसी वजह से इसे अभी तैयार पर्यटन सेवा मानकर यात्रा तय करने के बजाय पर्यटन बोर्ड की अगली सूचना देखना ठीक होगा।
मुख्य बातें
- पहले चरण में छह जिलों से एक-एक गांव चुना गया है।
- आधुनिक टेलिस्कोप, दूरबीन और अवलोकन क्षेत्र प्रस्तावित हैं।
- चयनित गांवों के युवाओं को 90 दिन प्रशिक्षण देने की योजना है।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



