रविवार सुबह राजधानी की सड़क पर सरकारी काफिले की जगह बस की खिड़कियाँ दिखीं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक के लिए जगदीशपुर जाते हुए अपना शासकीय वाहन और सुरक्षा काफिला मुख्यमंत्री निवास पर छोड़ दिया। मंत्री और उनका स्टाफ सुबह दस बजे निवास पहुँचे। वहाँ से तीन इलेक्ट्रिक बसें चलीं।
विज्ञप्ति कहती है, यह ईंधन, शासकीय संसाधन के मितव्ययी उपयोग और सुशासन का संदेश है। व्यक्तिगत वाहन, पायलट और फॉलो गाड़ियाँ उसी परिसर में रोक दी गईं। बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारी कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में अपनी गाड़ी छोड़कर ई-बस में बैठे। कण के हिसाब से बात साफ है: कैबिनेट ने उस दिन डीजल काफिले की जगह बिजली की बस चुनी। यह फैसला सवारी का है। नगर की रोज़ की ई-बस कितनी चली, कितना पीएम 2.5 घटा—यह विज्ञप्ति नहीं मापती।
रास्ते पर फूल, बैठक स्थल पर प्रदर्शनी
ई-बसों को राजधानीवासी देखने रुके। कई जगह पुष्पवर्षा हुई। पातरा पुल, लांबाखेड़ा और जगदीशपुर प्रवेश पर मुख्यमंत्री का स्वागत हुआ। पहुँचने पर विधायक विष्णु खत्री ने अंगवस्त्रम पहनाया, तिलक हुआ। जगदीशपुर दुर्ग में जनजातीय नायकों और सुशासन पर धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ भी उसी दौरे में है। प्रदर्शनी हवा की खबर नहीं; बस की सवारी है।
तस्वीर बस के अंदर की है या सड़क की?
जनसंपर्क की तस्वीर बस के भीतर की है। सीटों पर मुख्यमंत्री और मंत्री; खिड़कियों के बाहर पेड़। यह डिपो, चार्जिंग पॉइंट या 972 स्वीकृत नगर निगम बसों का बेड़ा नहीं। तीन बसें उस दिन की सवारी हैं।
मुख्य बातें
- मंत्री और स्टाफ सुबह 10 बजे निवास पहुँचे; तीन ई-बसों से सामूहिक प्रस्थान।
- व्यक्तिगत वाहन, पायलट और फॉलो गाड़ियाँ निवास पर रोक दी गईं; अधिकारी कुशाभाऊ ठाकरे परिसर से ई-बस में बैठे।
- रास्ते में पातरा पुल, लांबाखेड़ा और जगदीशपुर प्रवेश पर स्वागत; दुर्ग में धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ भी हुआ।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



